Saturday, March 21, 2015

योगदा सत्संग सखा आश्रम


   जब भी हम दिल से कोई इच्छा करते हैं, तो वह देर-सबेर जरूर ही पूरी होती है.. जब मैं यहां पिछली बार आया था तो यहां की हरियाली और खूबसूरती ने मेरा मन मोह लिया था, और कैमरा साथ न लाने की गलती से बहुत पछतावा भी हुआ था.. पर जब दुबारा यहां आने का मौका हाथ लगा तो मैं पूरी तरह तैयार था..
   'योगदा सत्संग सखा आश्रम', रांची के दिल मे बसता है.. शहर के बीचो-बीच ऐसी मनोरम और प्राकृतिक जगह बहुत कम देखने को मिलती है..








   यहां का स्मृति भवन खास है.. सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर एक छोटे ताजमहल जैसा दिखता है.. किसी भी कोने से यह आपका ध्यान खींच ही लेता है..








   ध्यान मंदिर यहां की सबसे शांत जगह है, यहां भीतर ध्यान और प्रवचन होते हैं..








   परमहंस योगानंद जी का कमरा, और उनकी इस्तेमाल की हुई कुछ चीजें भी यहां संजो कर रखी गईं हैं.. यह लीची का वृक्ष भी खास है, क्यूंकि इसी पेड़ के नीचे वे अपने शिष्यों को ज्ञान दिया करते थे..






   अमेरिका से आए केविन ने हमें पूरा आश्रम घुमाया और हमारे समूह के साथ कई जानकारियां भी  बांटी और यह भी कि कैसे वे सिर्फ एक किताब पढ़कर योगानंद जी के दर्शन से ऐसे प्रभावित हुए कि सीधे भारत आ पहुंचे..




   प्रकृति, ध्यान, शांति और आनंद के ऐसे बेजोड़ संगम में आ कर हमारा पूरा समूह भी बहुत प्रभावित था...








14 comments:

  1. आपके चित्रों में यह बहुत भी सुन्दर लग रहा है। हमारी भी बहुत इच्छा है यहां आने की, रोज उधर से गुजरते वक्त आश्रम के गेट को देखकर इच्छा जगती है कि भीतर जाकर देखूं, आज आपने दिखा दिया तो इच्छा प्रबल हो गयी है। कल रविवार की छुट्टी है, कल आते हैं हम भी.....

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    1. जरूर आईए.. और वापस लौटकर जरूर बताइएगा कि कैसा लगा..?
      :)

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  2. भारतीय नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार 22-03-2015 को चर्चा मंच "करूँ तेरा आह्वान " (चर्चा - 1925) पर भी होगी!

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद...

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  3. सुंदर चित्र , आपको भी नव वर्ष की शुभकामनायें

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  4. सुन्दर चित्र और वर्णन

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  5. अच्छा लगा अंदर से इसे देख। वैसे ये खरगोश और हंस सचमुच के होते तो क्या बात थी।

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    1. :) :) मुझे भी ऐसा ही लगा था...

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  6. आकर्षक चित्र

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  7. जब तक गुरुजी का बुलावा नही आएगा कैसे आऊँ आने की इच्छा तो बलवती है। पर शारीरिक असमर्थता रोक रही है, नसीब में हुआ तो आ ही जाऊंगा। जय गुरू।।

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