Tuesday, September 11, 2018

Thermodynamics और जिंदगी


“The total entropy of an isolated system can never decrease over time. Or in other words, the universe is always moving from order to disorder.”

मतलब,  विश्व की एंट्रोपी निरंतर, स्वाभाविक रूप से बढ़ती रहती है.. यह कभी कम नहीं होती.. यानी अगर विश्व की एंट्रोपी को दो अलग – अलग समय पर नापा जाए, तो दूसरी बार वो सदा ज़्यादा ही मिलेगी..

ऊष्मागतिकी के इस नियम को समझने के लिए हमें पहले एंट्रोपी के बारे में जानना होगा..

समय के साथ मैटर और ऊर्जा की गुणवत्ता कम होती जाती है..उपयोग करने योग्य ऊर्जा को अनिवार्य रूप से हम उत्पादन, विकास और मरम्मत के लिए खर्च करते हैं..
इस प्रकिया में वह ऊर्जा अब उपयोग के योग्य नहीं रहती.. यानी उपयोगी ऊर्जा अनुपयोगी बनकर खोती जा रही है.. एंट्रोपी इसी अनुपयोगी ऊर्जा के माप को कहते हैं..

अनुपयोगी ऊर्जा बढ़ने से एंट्रोपी भी बढ़ रही है..

एंट्रोपी का दिमागी चित्र बनाने की लिए हम उसे अनियमितता या बिना कायदे जैसा कुछ सोच सकते हैं.. जितनी ज्यादा अनियमितता, उतनी ज़्यादा एंट्रोपी..

अब आइये देखते हैं यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित करता है...

जैसे मैंने अभी कॉफी बनाया, तो मैं चाहूंगा की मेरी कॉफी गर्म रहे.. मैं गर्म कॉफी पसंद करता हूँ और मैं चाहता हूँ की मेरी कॉफी सदा गर्म रहे ताकि जब कभी मैं कॉफी पीना चाहूँ मैं गर्म कॉफी पी सकूँ.. लेकिन यह उसी वक्त से ठंडा होना शुरू हो जाता है जिस वक्त यह चूल्हे से उतरता है.. आप इसे थर्मस में भी रखें तो भी यह धीमा-धीमा तो ठंडा होगा ही..

हम इसे जीवन में हर जगह देख सकते हैं.. जैसे अगर हम अपना बगीचा संवारना छोड़ दें, यह जल्दी ही जंगल में तब्दील हो जाएगा.. या जैसे आप एक कार खरीदते हैं, तो यह उसी दिन से पुराना होना शुरू हो जाता है और एक दिन यह कबाड़ में भी बदल जाता है..

हम मेहनत कर सकते हैं चीजों को अस्थायी रूप से ठीक रखने के लिए, या इसे ऐसा कहें की एंट्रोपी को कम करने के लिए.. पर देर सबेर सारी चीजें अ-व्यवस्थित हो ही जाती है, या इसे ऐसा भी कहा जा सकता है कि उन्हें  एंट्रोपी हो जाती है...

चाहे मैं कितना ही मेहनत क्यूँ न करूँ, मेरी चीजें एक दिन टूट ही जाएंगी, शरीर भी काम करना बंद कर देगा, सूर्य को भी एक दिन बुझ जाना है, और यह ब्रह्माण्ड भी एक दिन ख़त्म हो जाएगा.. सब को यह ‘एंट्रोपी’ निगल जाएगी..

हम व्यवस्था चाहते हैं, चीजें अच्छी रहें, नयी रहें। लोग हमेशा स्वस्थ रहें..

पर, यहाँ बीच में आ जाता है Thermodynamics, और मेरा पसंदीदा शब्द ‘एंट्रोपी’..





Sunday, December 18, 2016

Making of a Panorama


   पिछले दिनों दोबारा 'गौतमधारा जल प्रपात' जाने का मौका मिला.. यह रांची से करीब 40 की०मी० की दूरी पर स्थित एक बहुत ही सुन्दर जलप्रपात है..

   सीढ़ीयां उतरकर जब आप इस बेहतरीन झरनें को देखते हैं तो दंग रह जाते हैं, यह बहुत ही प्राकृतिक वातावरण में है और यहां आपको ऋतु-अनुसार स्थानीय फल भी बिकते मिल जाएंगे जो बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं..


   जलप्रपात के सामनें पानी का एक प्राकृतिक बड़ा कुंड बना है जो यहां आने वालों को बहुत आकर्षित करता है..


   ऐसी प्राकृतिक जगहों पर आकर एक बात जो महसूस होती है वह है प्रकृति की विशालता, जो हमारी आंखो में तो समा जाती है पर हमारे कैमरे में नहीं समा पाती..


   इस विशालता को कैमरे में कैद करने के लिए या तो हम 'Wide Angle' लेंस का उपयोग कर सकते हैं, पर उसमें भी 'resolution' सीमित होनें से थोड़ी कमी रह जाती है, या हम पैनोरमा (Panorama) मोड में फोटोग्राफी कर सकते हैं..

   पैनोरमा कई फोटोग्राफ्स को आपस में जोड़कर बनाया जाता है जिससे एक वृहद दृश्य वाला फोटोग्राफ बनता है, यह देखने में बहुत ही सुन्दर लगता है..

   स्मार्टफोन्स में कई एप्स 'पैनोरमा' लेने के लिए होते हैं, और कुछ नए कैमरे भी इस फीचर के साथ आते है.. पर सबसे अच्छा तरीका अलग-अलग फोटोग्राफ्स लेकर उसे 'फोटोशोप' की सहायता से पैनोरमा में बदलना ही है..

   इसका तरीका भी बहुत आसान है, 'सीरीज़' में 'ओवरलैप' करते हुए चित्र लीजीए और सभी को फोटोशोप में इम्पोर्ट कर स्टीच कर लीजिए.. एक शानदार पैनोरमा तैयार है.. :)

   सीरीज मे ओवरलैप करते हुए चित्र लेने का मतलब है: क्योंकि पैनोरमा बहुत से चित्रों को मिलाकर बनेगा, तो हमें कई चित्र लेनें होंगे, और हर चित्र एक दूसरे को ओवरलैप करते हुए एक ही दिशा में आगे बढ़ते हुए लेना है... 'Tripod' का इस्तेमाल करें तो बेहतर है, इससे आपका लेवल सही रहेगा..



   1) फोटोग्राफ्स लेने के बाद 'फोटोशोप' के 'File' मेन्यु में जाकर 'Automate' और फिर 'Photomerge' को चुन लीजिए..
   2) यहां 'Browse' में जाकर वो सारे फोटोग्राफ्स चुनकर 'OK' पर क्लिक कर दीजिए..



   3) ध्यान रखिए, बाईं तरफ 'लेआऊट' में 'Auto' चुना हुआ हो और नीचे 'Blend Images Together' और 'Geometric Distortion Correction' दोनों चुना हुआ हो..
   4) अब यहां फिर से 'OK' करना है..

   अब आगे का काम फोटोशोप खुद कर लेगा, और आपको एक शानदार पैनोरमा सामनें दिखाई देगा.. जरूरत के हिसाब से 'क्रोप' कर लीजिए और आपका पैनोरमा तैयार है:






Saturday, March 21, 2015

योगदा सत्संग सखा आश्रम


   जब भी हम दिल से कोई इच्छा करते हैं, तो वह देर-सबेर जरूर ही पूरी होती है.. जब मैं यहां पिछली बार आया था तो यहां की हरियाली और खूबसूरती ने मेरा मन मोह लिया था, और कैमरा साथ न लाने की गलती से बहुत पछतावा भी हुआ था.. पर जब दुबारा यहां आने का मौका हाथ लगा तो मैं पूरी तरह तैयार था..
   'योगदा सत्संग सखा आश्रम', रांची के दिल मे बसता है.. शहर के बीचो-बीच ऐसी मनोरम और प्राकृतिक जगह बहुत कम देखने को मिलती है..








   यहां का स्मृति भवन खास है.. सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर एक छोटे ताजमहल जैसा दिखता है.. किसी भी कोने से यह आपका ध्यान खींच ही लेता है..








   ध्यान मंदिर यहां की सबसे शांत जगह है, यहां भीतर ध्यान और प्रवचन होते हैं..








   परमहंस योगानंद जी का कमरा, और उनकी इस्तेमाल की हुई कुछ चीजें भी यहां संजो कर रखी गईं हैं.. यह लीची का वृक्ष भी खास है, क्यूंकि इसी पेड़ के नीचे वे अपने शिष्यों को ज्ञान दिया करते थे..






   अमेरिका से आए केविन ने हमें पूरा आश्रम घुमाया और हमारे समूह के साथ कई जानकारियां भी  बांटी और यह भी कि कैसे वे सिर्फ एक किताब पढ़कर योगानंद जी के दर्शन से ऐसे प्रभावित हुए कि सीधे भारत आ पहुंचे..




   प्रकृति, ध्यान, शांति और आनंद के ऐसे बेजोड़ संगम में आ कर हमारा पूरा समूह भी बहुत प्रभावित था...








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